आईआईटी रिपोर्ट का हवाला देकर मंत्री सरनाईक को घेरा, दोषियों पर कार्रवाई और स्वतंत्र जांच समिति की मांग

भाईंदर: मीरा-भाईंदर के चर्चित बॉटल नेक फ्लाईओवर को लेकर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक और विधायक नरेंद्र मेहता के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। फ्लाईओवर के उद्घाटन और कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
मंत्री प्रताप सरनाईक द्वारा फ्लाईओवर उद्घाटन की जांच संबंधी पत्र भेजे जाने पर विधायक नरेंद्र मेहता ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मामले में आईआईटी की रिपोर्ट पहले ही प्रस्तुत की जा चुकी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि फ्लाईओवर प्रकरण में ‘डबल रोल’ नहीं चल सकता और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।मेहता ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में फ्लाईओवर निर्माण में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए जांच की मांग की थी। उनका दावा है कि पुल निर्माण पूरा होने के बावजूद उसे लंबे समय तक जनता के लिए नहीं खोला गया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हस्तक्षेप के बाद ही इसे यातायात के लिए शुरू किया गया।विधायक मेहता ने कहा कि आगामी मानसून सत्र में भी वे इस मामले को उठाएंगे और जिम्मेदार अधिकारियों तथा ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे। उन्होंने फ्लाईओवर के डिजाइन और निर्माण से जुड़े निर्णयों की भी जांच कराने की मांग करते हुए स्वतंत्र जांच समिति गठित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एमएमआरडीए के प्रमुख हैं, इसलिए मंत्री सरनाईक को उनसे मिलकर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। मेहता का आरोप है कि संबंधित लोगों पर कार्रवाई की संभावना कम दिखाई दे रही है, इसलिए निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
दिल्ली दरबार फ्लाईओवर का उदाहरण देते हुए मेहता ने कहा कि वहां अधूरे कार्यों के बावजूद पुल को यातायात के लिए खोल दिया गया था, जबकि गोल्डन नेस्ट फ्लाईओवर के मामले में अलग रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उद्घाटन ही विवाद का विषय है तो दिल्ली दरबार फ्लाईओवर मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।इस दौरान मेहता ने भाईंदर पश्चिम में प्रस्तावित एसटी डिपो परियोजना का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री सरनाईक द्वारा उद्घाटन किए जाने के नौ महीने बाद भी परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी है। उन्होंने कहा कि केवल नारियल फोड़ने से विकास कार्य पूरे नहीं होते, बल्कि परियोजनाओं को समय पर पूरा करना भी उतना ही जरूरी है।
बॉटल नेक फ्लाईओवर को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। आगामी मानसून सत्र में इस मुद्दे के और अधिक गरमाने की संभावना जताई जा रही है।
