मीरा-भायंदर | हमारा मीरा भायंदर
मीरा-भायंदर महानगरपालिका की महासभा में जमकर हंगामा हुआ। पत्रकारों और नागरिकों के साथ कथित मारपीट के मामले में भाजपा के करीब 16 नगरसेवकों के खिलाफ मामला दर्ज होने की खबर सामने आई है।
लेकिन इस हंगामे के बीच एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आखिर करोड़ों रुपये के विकास प्रस्ताव इतनी जल्दबाजी में कैसे मंजूर हो गए?
जानकारी के मुताबिक, महासभा में भूमिगत सीवरेज योजना के दूसरे चरण के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की मरम्मत और रखरखाव के लिए 188 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
यानी कुल मिलाकर करीब 688 करोड़ रुपये के दो बड़े प्रस्तावों को हरी झंडी मिल गई।
इतना ही नहीं, बस किराए में बढ़ोतरी, जल आपूर्ति योजना, पंपिंग हाउसों की मरम्मत और किसानों को आर्थिक सहायता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे भी महासभा के एजेंडे में शामिल थे।
विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लगभग 32 विषयों वाले एजेंडे पर पर्याप्त चर्चा किए बिना जल्दबाजी में फैसले लिए गए।
वहीं भाजपा समूह नेता हसमुख गहलोत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शहर के विकास कार्य समय पर पूरे हों, इसलिए फैसले तेजी से लिए जा रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जनता के करोड़ों रुपये खर्च होने वाले हैं, तो क्या इन प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा नहीं होनी चाहिए थी?
क्या विकास के नाम पर जल्दबाजी सही है, या जनता को हर रुपये का हिसाब मिलना चाहिए?
आपकी क्या राय है? कमेंट करके जरूर बताएं।
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