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11 साल की बच्ची की थायरॉयड ग्रंथि में फंसी मछली की हड्डी,डॉक्टरों ने बेहद जटिल सर्जरी कर बचाई जान
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11 साल की बच्ची की थायरॉयड ग्रंथि में फंसी मछली की हड्डी,डॉक्टरों ने बेहद जटिल सर्जरी कर बचाई जान

मीरा रोड के वॉकहार्ट हॉस्पिटल, मीरा रोड में डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण सर्जरी कर 11 साल की बच्ची की थायरॉयड ग्रंथि में फंसी मछली की हड्डी सफलतापूर्वक निकाल दी। यह सर्जरी वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ एवं हेड एंड...

मीरा रोड के वॉकहार्ट हॉस्पिटल, मीरा रोड में डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण सर्जरी कर 11 साल की बच्ची की थायरॉयड ग्रंथि में फंसी मछली की हड्डी सफलतापूर्वक निकाल दी। यह सर्जरी वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ एवं हेड एंड नेक ऑनकोसर्जन डॉ. चंद्र वीर सिंह के नेतृत्व में डॉ. शीतल राडिया और उनकी टीम ने की।बच्ची मछली खाने के बाद लगातार गले में दर्द और निगलने में तकलीफ की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थी। आमतौर पर ऐसे मामलों में मछली की हड्डी गले या भोजन नली में फंसी होती है और एंडोस्कोपी से आसानी से निकाल ली जाती है। लेकिन इस मामले में एंडोस्कोपी के दौरान कोई हड्डी दिखाई नहीं दी। डॉक्टरों को स्थिति पर संदेह हुआ, इसलिए उन्होंने सीटी स्कैन कराने का फैसला किया।
सीटी स्कैन में पता चला कि मछली की हड्डी भोजन नली की दीवार को छेदकर बाहर निकल चुकी थी और थायरॉयड ग्रंथि के बाएं हिस्से में जाकर फंस गई थी। इसके कारण वहां गंभीर संक्रमण फैल गया था और मवाद भी जमा हो गया था।


डॉ. चंद्र वीर सिंह के अनुसार, इस तरह के मामले दुनिया भर में बहुत कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने बताया कि जब कोई हड्डी भोजन नली से बाहर निकलकर आसपास के ऊतकों या थायरॉयड ग्रंथि तक पहुंच जाती है, तब उसे एंडोस्कोपी से निकालना संभव नहीं रहता। ऐसे में मरीज की जान बचाने के लिए ओपन सर्जरी ही एकमात्र प्रभावी उपचार होता है।सर्जरी से पहले बच्ची को नसों के जरिए एंटीबायोटिक दवाएं देकर संक्रमण को नियंत्रित किया गया। इसके बाद डॉक्टरों ने बेहद सावधानी के साथ गले की ओपन सर्जरी की। इस दौरान थायरॉयड ग्रंथि में जमा मवाद निकाला गया और काफी तलाश के बाद मछली की हड्डी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।


डॉक्टरों के अनुसार, यह ऑपरेशन इसलिए भी बेहद कठिन था क्योंकि थायरॉयड ग्रंथि के आसपास शरीर की कई महत्वपूर्ण नसें और ग्रंथियां होती हैं। इनमें आवाज को नियंत्रित करने वाली नसें और शरीर में कैल्शियम का संतुलन बनाए रखने वाली पैराथायरॉयड ग्रंथियां शामिल हैं। ऑपरेशन के दौरान यदि इनमें से किसी भी हिस्से को जरा-सा भी नुकसान पहुंचता, तो बच्ची की आवाज हमेशा के लिए प्रभावित हो सकती थी या उसे जीवनभर कैल्शियम से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता था। संक्रमण और मवाद की मौजूदगी ने इस सर्जरी को और भी अधिक जटिल बना दिया था। ऐसे में हड्डी निकालते हुए इन सभी महत्वपूर्ण अंगों को सुरक्षित रखना डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी।


डॉक्टरों की विशेषज्ञता और सावधानी की बदौलत सर्जरी पूरी तरह सफल रही। बच्ची की आवाज सामान्य है, उसके शरीर में कैल्शियम का स्तर भी सामान्य है और वह अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में लौट चुकी है।विशेषज्ञों का कहना है कि मछली की हड्डी का गले में फंसना आम बात हो सकती है, लेकिन उसका भोजन नली को छेदकर थायरॉयड ग्रंथि तक पहुंच जाना बेहद दुर्लभ और गंभीर स्थिति है। इसलिए मछली खाते समय हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए और उसे अच्छी तरह चबाकर खाना चाहिए। छोटे बच्चों को मछली खिलाते समय उसके सभी कांटे पहले ही निकाल देने चाहिए। यदि मछली खाने के बाद गले में लगातार दर्द, निगलने में परेशानी या गर्दन में सूजन महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार शुरुआती जांच में हड्डी दिखाई नहीं देती, इसलिए यदि तकलीफ बनी रहे तो डॉक्टर की सलाह पर सीटी स्कैन जैसी जांच कराना जरूरी होता है। समय पर सही जांच और इलाज से ऐसी दुर्लभ लेकिन गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

Shahnawaz Khan

शहनवाज़ खान एक समर्पित पत्रकार हैं, जो सटीक और प्रभावशाली खबरों के लिए जाने जाते हैं। वे वर्तमान घटनाओं, जनहित के मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। सत्य और विश्वसनीय पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पाठकों को जागरूक और सूचित रखने का कार्य करती है।
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