मीरा-भाईंदर | HMB NEWS (हमारा मीरा भाईंदर)
मीरा-भाईंदर महानगरपालिका में हाल ही में हुए हंगामे और पत्रकारों के साथ कथित मारपीट का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब नगर आयुक्त के आवास पर भीड़ जुटने और दबाव बनाने के गंभीर आरोपों ने शहर की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस मामले को लेकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और मीरा-भाईंदर पुलिस आयुक्त से शिकायत कर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
आयुक्त के आवास पर 250 से 300 लोगों के पहुंचने का दावा
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आरोप लगाया कि घटना वाली रात विधायक नरेंद्र मेहता और कुछ नगरसेवकों सहित करीब 250 से 300 लोग नगर आयुक्त के आवास पर एकत्र हुए थे। सरनाईक के मुताबिक, इस दौरान आयुक्त पर पत्रकारों और जागरूक नागरिकों के खिलाफ धारा 353 के तहत मामला दर्ज कराने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाया गया।
सरनाईक ने बताया कि पत्रकारों से घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर पत्रकारों और नागरिकों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की जा रही थी।
बहुमत का मतलब मनमानी करने का अधिकार नहीं : सरनाईक
शहर की राजनीतिक परिस्थितियों पर नाराजगी जताते हुए प्रताप सरनाईक ने कहा कि लोकतंत्र में बहुमत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि कोई कानून को अपने हाथ में ले सकता है। उन्होंने कहा कि अपने 17 वर्षों के विधायक कार्यकाल में उन्होंने इस तरह की घटनाएं नहीं देखीं।
उन्होंने महानगरपालिका भवन में हुए हंगामे, पत्रकारों पर कथित हमलों और नागरिकों के साथ हुए विवादों को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया।
नगर आयुक्त के परिवार की सुरक्षा पर भी उठाए सवाल
सरनाईक ने कहा कि कथित घटना के समय नगर आयुक्त की पत्नी और छोटे बच्चे भी आवास पर मौजूद थे। ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों के वहां पहुंचने और दबाव बनाने के आरोप बेहद गंभीर हैं। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
दोषी पाए जाने पर नगरसेवकों के पद रद्द करने की मांग
प्रताप सरनाईक ने राज्य सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में नगर आयुक्त के आवास में अनधिकृत प्रवेश, धमकी या दबाव बनाने के आरोप सही साबित होते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने इस मामले में शामिल पाए जाने वाले जनप्रतिनिधियों के नगरसेवक पद रद्द करने पर भी विचार करने की मांग की है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
इस पूरे विवाद ने मीरा-भाईंदर के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। हालांकि, नगर आयुक्त के आवास पर जबरन प्रवेश और दबाव बनाने के आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। विधायक नरेंद्र मेहता और संबंधित नगरसेवकों का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी या शहर में जारी राजनीतिक टकराव और गहराएगा?
