काशीमीरा में महाराज की प्रतिमा पर जगह-जगह सफेद धब्बे, रखरखाव पर सवाल; क्या सिर्फ शिवजयंती और महाराष्ट्र दिवस पर ही याद आते हैं महाराष्ट्र के आराध्य दैवत?
संवाददाता: सन्नी पटेल : महाराष्ट्र के आराध्य दैवत, हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक और करोड़ों शिवभक्तों की आस्था एवं स्वाभिमान के प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज के काशीमीरा स्थित स्मारक की तस्वीरें स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
सामने आई तस्वीरों में छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य घुड़सवार प्रतिमा पर जगह-जगह सफेद धब्बे और सतह पर मैल जैसी परत साफ दिखाई दे रही है। महाराज की पगड़ी, कंधों, पोशाक और घोड़े की प्रतिमा पर नजर आने वाले ये निशान स्मारक की नियमित सफाई, संरक्षण और रखरखाव को लेकर सवाल पैदा करते हैं।
आखिर मीरा-भाईंदर महानगरपालिका और मौजूदा प्रशासन की नजर इस स्मारक पर क्यों नहीं पड़ रही? क्या महाराष्ट्र के आराध्य दैवत का सम्मान केवल भाषणों, माल्यार्पण और तस्वीरें खिंचवाने तक ही सीमित रह गया है?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिवजयंती और 1 मई, महाराष्ट्र दिवस जैसे अवसर आते हैं, तब छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर बड़े-बड़े कार्यक्रम, राजनीतिक भाषण, माल्यार्पण और फोटोबाजी देखने को मिलती है। लेकिन वर्ष के बाकी दिनों में महाराज के स्मारकों की देखभाल की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाता है?
यह सवाल किसी धर्म, जाति या राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के स्वाभिमान और छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान से जुड़ा हुआ है।
जिस महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज को आराध्य दैवत माना जाता है, वहां उनकी प्रतिमा की ऐसी स्थिति दिखाई देना क्या प्रशासन के लिए चिंता का विषय नहीं होना चाहिए?
मुख्यमंत्री महोदय, क्या यही है महाराज के प्रति सम्मान?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से भी यह सीधा और गंभीर सवाल है कि आखिर राज्य में महापुरुषों के स्मारकों के संरक्षण और सम्मान को लेकर स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही कब तय होगी?
क्या छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर केवल जयघोष करना ही पर्याप्त है? क्या उनके स्मारकों की स्वच्छता, सुरक्षा और गरिमा बनाए रखना शासन और प्रशासन का कर्तव्य नहीं है?
मराठी समाज और शिवप्रेमियों से भी सीधा सवाल!
महाराष्ट्र के मराठी समाज, शिवप्रेमियों और मीरा-भाईंदर के जागरूक नागरिकों से भी यह सवाल है कि क्या महाराज के सम्मान की आवाज केवल शिवजयंती के दिन ही उठनी चाहिए?
जब महाराज की प्रतिमा की ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं, तो क्या प्रशासन से जवाब मांगना जरूरी नहीं हो जाता?
महाराज का सम्मान केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि वर्ष के 365 दिनों की जिम्मेदारी है।
अब मीरा-भाईंदर महानगरपालिका को स्पष्ट करना चाहिए कि काशीमीरा स्थित इस स्मारक की नियमित सफाई कौन करता है, रखरखाव के लिए कितना बजट निर्धारित है और प्रतिमा पर दिखाई देने वाले धब्बों को हटाने तथा उसके संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
सवाल सीधा है — क्या प्रशासन अगली शिवजयंती का इंतजार करेगा, या महाराज के स्मारक के सम्मान और संरक्षण के लिए अभी ठोस कार्रवाई करेगा?
छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर राजनीति नहीं, उनके सम्मान के लिए जिम्मेदारी निभाइए!
