अधिवक्ता मोसीन ने एमबीवीवी पुलिस की कार्रवाई की सराहना की, कहा- बेगुनाह को सजा नहीं मिलनी चाहिए

मीरा-भाईंदर : मीरा-भाईंदर-वसई विरार पुलिस की क्राइम यूनिट-4 द्वारा करीब 140 करोड़ रुपये के ड्रग्स रैकेट का पर्दाफाश किए जाने के मामले में दो आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। जांच के दौरान दोनों आरोपियों की मामले में कोई भूमिका सामने नहीं आने के बाद उन्हें कोर्ट से डिस्चार्ज कर दिया गया है। दोनों आरोपी अब ठाणे जेल से पीआर बॉन्ड पर रिहा होकर बाहर आ चुके हैं।
इस मामले में दोनों आरोपियों की पैरवी कर रहे अधिवक्ता मोसीन ने बताया कि आरोपियों ने रिमांड के दौरान उन्हें अपना वकील नियुक्त किया था। आरोपियों के परिवार ने भी दावा किया था कि उनका इस ड्रग्स रैकेट से कोई संबंध नहीं है।
अधिवक्ता मोसीन के अनुसार, जांच टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कम समय में विस्तृत जांच की। जांच के दौरान जब दोनों आरोपियों की भूमिका सामने नहीं आई तो पुलिस की ओर से वसई कोर्ट में संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत आवेदन किया गया।
इसके बाद 8 सितंबर को
विशेष अदालत में डिस्चार्ज के लिए आवेदन पेश किया गया। मामले से जुड़े तथ्यों और जांच रिपोर्ट को देखने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को डिस्चार्ज करने का आदेश दिया, जिसके बाद वे ठाणे जेल से पीआर बॉन्ड पर रिहा हो गए।
अधिवक्ता मोसीन ने ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए एमबीवीवी पुलिस और क्राइम यूनिट-4 की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस ने इस मामले में बेहतरीन काम किया है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ पुलिस की लड़ाई बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर पुलिस पर बेगुनाह लोगों को फंसाने के आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन इस मामले में जांच के बाद जिन दो लोगों की भूमिका नहीं मिली, उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत मिली है। उनके मुताबिक, यह उदाहरण बताता है कि जांच एजेंसी ने तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की।
अधिवक्ता ने कहा कि अपराधियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, लेकिन किसी निर्दोष व्यक्ति को सजा नहीं मिलनी चाहिए।
